ग्रामीणों ने राखड़ पाटे जाने को लेकर गंभीर आरोप लगाया प्रशासन पर
जंगल एवं जलाशय किनारे पर राखड़ पाटे जाने को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश तीन दिनों से राखड़ भरे 9 हाईवा को ग्रामीणों ने रोक कर कलेक्टर एसडीएम वन विभाग पर्यावरण को सूचना देने के बाद भी अब
तक कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच रहा है जिससे ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है ग्रामीणों का कहना है जब तक प्रशासन आकर इस अवैध राखड़ पाटे जाने पर कार्रवाई नहीं करेगा तब तक इन वाहनों को नहीं जाने दिया जाएगा क्योंकि छोटे-छोटे बच्चों का आदिवासी बालक आश्रम की बाउंड्री दिवाल से ऊपर राखड़ डंप किया जा रहा है जिससे छात्रावास में रहने वाले बच्चों को सांस लेने में दिक्कत गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है और जलाशय में यह राखड़ जाकर पानी में मिल रहा है बरसात के दिनों में जंगली जानवरों को इस दलदल में मौत होने की संभावना है उच्च अधिकारी को सूचना देने के बाद भी 3 दिन से प्रशासन का कोई भी अधिकारी मौके पर जांच के लिए नहीं आ रहा है शीघ्र अगर इस पर कार्रवाई नहीं होगी तो हम सभी ग्रामीण उग्र आंदोलन चक्का जाम सहित कोर्ट का दरवाजा खट खटाएंगें
बच्चों में धूल (डस्ट) से एलर्जी, अस्थमा, त्वचा संबंधी समस्याएं (जैसे एक्जिमा), और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, जिससे नींद में खलल और स्कूल में एकाग्रता की कमी होती है; वहीं, धूल में मौजूद हानिकारक रसायन (जैसे सीसा) बच्चों के विकास को बाधित कर सकते हैं और गंभीर श्वसन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। छोटे बच्चे, जो अक्सर खेलते समय धूल निगल लेते हैं, विशेष रूप से जोखिम में होते हैं, जिससे उनके फेफड़ों और न्यूरोडेवलपमेंट पर असर पड़ सकता है।