सूरजपुर – छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एसईसीएल के अलग-अलग कोल माइंस की वजह से किसान बेहद परेशान दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि एसईसीएल के कोल माइंस से निकलने वाला काला पानी खेतों में पहुंच रहा है और इसकी वजह से किसानों के खेत बंजर हो रहे हैं। माइंस की वजह से आसपास के 25 से अधिक गांव के किसान अपने खेतों में फसल का उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि भूमिगत जल स्रोत पूरी तरीके से सूख चुका है और यहां बोरवेल नहीं चल पा रहे हैं हालात ऐसे हैं कि किसानो के पास जमीन तो है लेकिन एक तरफ प्रदूषण और दूसरी तरफ बोरवेल फेल होने की वजह से किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं और अब कई-कई एकड़ जमीन होने के बाद भी किसान मजदूर बन कर रह गए हैं,, ग्रामीण अपनी दुर्दशा की कहानी बयां करते नजर आते हैं देखिए हमारी ग्राउंड जीरो से पड़ताल करती यह खास रिपोर्ट
वीओ – सूरजपुर के बिश्रामपुर इलाके में एसईसीएल के चार कोल माइंस संचालित हैं, जिसमें अमेरा कोल माइंस, गायत्री कोल माइंस, रेहर माइंस और केतकी कोल माइंस संचालित हैं। यहां से हर रोज करोड़ों रुपए का कोयला निकाला जा रहा है लेकिन खदान की वजह से होने वाले प्रदूषण की वजह से आसपास के किसान बेहद परेशान हैं। कई किसानों ने तंग आकर अब खेती करना छोड़ दिया है। कोयला खदान से निकलने वाला गंदा काला पानी उनके खेतों में पहुंच रहा है जिसकी वजह से उनके खेत अब उपजाऊ नहीं रह गया है क्योंकि पूरे साल कोयला खदान का गंदा पानी खेतों में बहता है और जब भी बरसात के दिनों में खेती करते हैं तब उसका सीधे तौर पर असर देखने को मिल रहा है,,अंडरग्राउंड कोल माइंस के कारण भूमिगत जल स्रोत भी 400 फीट नीचे चला गया है। कई किसानों ने बोरवेल भी कराया ताकि रवि और ग्रीष्म कालीन खेती कर सके, अपने खेतों में सब्जियों का उत्पादन कर सकें लेकिन बोरवेल सक्सेस नहीं हो पा रहा है।
वीओ – किसानों का कहना है कि जब कोयला खदान शुरू नहीं हुआ था तब एसईसीएल ने उन्हें कहा था कि उनके इलाके का तेजी से विकास होगा लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। कोयला खदान की वजह से करीब 50000 हेक्टेयर से अधिक खेती की जमीन अलग-अलग गांव में प्रभावित हुई है किसानों का यह भी कहना है कि उन्होंने कई बार एसईसीएल की अधिकारियों से बात की, अपनी समस्याओं को रखा लेकिन कभी सुनवाई नहीं हुई और यही वजह है कि अब किसान थक चुके हैं किसान क्या कह रहे हैं सुन लीजिए।
वीओ- बात यहीं तक नहीं है कोयला खदान शुरू करने से पहले वादा किया गया था कि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलेगा और इसके लिए क्षेत्रीय युवाओं को अलग-अलग वोकेशनल ट्रेनिंग भी दिया गया ताकि वह कोल माइंस में जाकर काम कर सके लेकिन ट्रेनिंग दिलाने के बाद उन्हें काम नहीं दिया गया ऐसे सैकड़ो युवक हैं जो ट्रेनिंग लेने के बाद अब बेरोजगार घूम रहे हैं और यही वजह है कि एसईसीएल पर अब वादा खिलाफी का आरोप खुलकर लग रहा है।
वीओ – किसानों के इस दर्द को लेकर जब साधना न्यूज़ ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से बात की तो अधिकारियों ने कहा कि वह पर्यावरण मंडल के अधिकारियों से इसे लेकर बात करेंगे ताकि प्रदूषण आखिर इतने बड़े स्तर पर हो रहा है तो पर्यावरण मंडल के जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे हैं क्योंकि पर्यावरण मंडल के अधिकारियों ने ही माइंस के लिए एनओसी जारी किया हुआ है
क्लोजिंग वीओ – सवाल है कि आखिर ऐसी अनदेखी एसईसीएल क्यों कर रहा है और जिला प्रशासन भी खामोश क्यों बैठा हुआ है क्योंकि जब किसानों का दर्द अनसुना किया जाता है तो आंदोलन और प्रदर्शन होते हैं, फिर उसे रोकने के लिए तमाम तरीके अपनाए जाते हैं जो बाद में विवादों में आ जाते हैं ऐसे मामलों में समय रहते प्रशासन को हस्तक्षेप करने की जरूरत है ताकि किसानों के साथ न्याय हो सके और उनके खेतों में हरियाली लौट सके।