
24 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को आस्था, पवित्रता और सूर्य उपासना के छठ महापर्व का शुभारंभ नहाय-खाय पूरे देश में हुआ है छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में इसका रंग सबसे अलग दिखा, जहाँ श्रद्धा और भक्ति के संग माहौल दिवाली की तरह जगमगाने लगा।अरपा नदी के तट पर स्थित तोरवा घाट जिसे छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा छठ घाट कहा जाता है इस बार आकर्षक लाइटों, और रंग-बिरंगी झालरों फूलों से ऐसे सजाया गया कि पूरा घाट सुनहरी रोशनी से जगमगा गया दूर से देखने पर तोरवा घाट किसी दिव्य दीपोत्सव स्थल की तरह दिखाई दे रहा था। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु अरपा मइया की पूजा-अर्चना के लिए घाट पर जुटे थे महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में व्रत विधि शुरू की,वहीं पुरुषों ने घाट की सजावट और तैयारियों में सहयोग भी दिया।नगर निगम, जिला प्रशासन, और सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर साफ-सफाई, सुरक्षा और लाइटिंग की व्यवस्था को संभाली हुई थी चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से हुई इस दिन व्रती महिलाएं स्नान कर अरपा मइया की पूजा करती हैं और सत्तू-भात ग्रहण कर के व्रत का प्रारंभ करती हैं।शाम को घाट पर महाआरती का आयोजन भी हुआ, जिसमें सैकड़ों दीपों की ज्योति से पूरा घाट आलोकित हो नज़ारा देखने को मिला छठ पर्व सूर्यदेव और छठ मइया की उपासना का पर्व है जो लोक आस्था, प्रकृति और पवित्रता का प्रतीक है।नगर निगम ने इसे “इको-फ्रेंडली छठ पर्व” बनाने का लक्ष्य रखा, जिसके तहत नदी किनारे प्लास्टिक के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाई गई है तोरवा घाट को लगभग दो लाख रंगीन बल्बों, LED स्ट्रिप्स, और फूलों की झालरों से सजाया गया है घाट तक पहुंचने के मार्गों को बैरिकेड किया गया और अलग-अलग प्रवेश द्वार भी बनाए गए है जबकि महिला पुलिस बल और गोताखोर दल भी सुरक्षा में तैनात हैं।