
पाकिस्तान के लिए जल संकट की एक और चुनौती सामने आई है। भारत के बाद अब अफगानिस्तान भी पाकिस्तान की ओर बहने वाली नदियों पर नियंत्रण की योजना बना रहा है। तालिबान सरकार ने घोषणा की है कि वह देश में नए बांधों का निर्माण करेगी, जिससे पाकिस्तान को जाने वाली जल आपूर्ति सीमित की जा सकती है।यह घोषणा हाल ही में तालिबान सरकार के जल संसाधन मंत्रालय की ओर से की गई है, जो अक्टूबर 2025 के तीसरे सप्ताह में जारी हुई हैयह निर्णय अफगानिस्तान में लिया गया है, खासतौर पर काबुल नदी बेसिन और उससे जुड़ी जल प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत तक पानी पहुंचाती हैं।मुख्य रूप से तालिबान सरकार इस परियोजना की अगुवाई कर रही है। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार और उसके जल संसाधन विभाग ने इस कदम को लेकर चिंता भज जताई है। अंतरराष्ट्रीय जल विशेषज्ञों और दक्षिण एशियाई का कहना है कि यह फैसला क्षेत्रीय जल विवाद को लेकर और गहरा हो सकता है।अफगानिस्तान का कहना है कि उसे अपने नागरिकों के लिए सिंचाई, बिजली उत्पादन और पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए नदियों के जल का अधिक उपयोग करने का अधिकार है। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय नदी समझौतों की भावना के खिलाफ है और इससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है तालिबान प्रशासन ने अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में कुनार नदी और काबुल नदी पर छोटे और मध्यम आकार के बांधों का निर्माण करना शुरू कर दिया है। यदि ये परियोजनाएं पूरी हो जाती है तो पाकिस्तान को बहने वाले जल की मात्रा में 15-20% तक कमी आ सकती है भारत के साथ पहले से ही जल विवाद झेल रहे पाकिस्तान के लिए यह एक नई ‘दोहरी चुनौती’ बनकर उभर रही है। भारत पहले ही सिंधु जल संधि के तहत अपने अधिकार के पानी का उपयोग बढ़ा रहा है, और अब अफगानिस्तान का यह कदम पाकिस्तान की कृषि और ऊर्जा सुरक्षा को और कमजोर कर सकता है।