
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया और भारत सरकार (केंद्र)। सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उस जनहित याचिका के जवाब में उठाया गया हैं जिसमें ऑनलाइन जुआ पर पूरे देश में प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।हॉल कि याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने आगामी सुनवाई की तैयारी के लिए केंद्र से रिपोर्ट मांगी थी भारत के सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली में यह सुनवाई हुई लेकिन यह मामला पूरे देश के ऑनलाइन जुआ उद्योग और उसके प्रभाव से जुड़ा है।याचिका में तर्क दिया गया है कि ऑनलाइन जुआ युवाओं और समाज के लिए खतरा है। यह वित्तीय अपराध और अन्य अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देता है। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से गंभीर है और केवल राज्यों पर छोड़ना पर्याप्त नहीं होगाअदालत ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों की निगरानी, रोकथाम के उपाय, कानूनी ढांचा और संभावित सुधारों की विस्तृत जानकारी पेश करे। अदालत ने संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो पूरे देश में अस्थायी रूप से ऑनलाइन जुआ पर रोक लगाने पर विचार किया जा सकता है। अगली सुनवाई में केंद्र की रिपोर्ट और अन्य कानूनी पहलुओं की समीक्षा होगी