
पटना।बिहार विधानसभा चुनाव के बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने इस बार अप्रत्याशित कदम उठाया है। पार्टी ने कई सीटों पर गैर मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर सभी राजनीतिक दलों को चौंका दिया है। अब तक मुस्लिम राजनीति से जोड़ी जाने वाली AIMIM की इस रणनीति ने बिहार के सियासी समीकरणों में नई हलचल मचा दी है।राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ओवैसी का यह फैसला पार्टी की छवि बदलने और सीमांचल से बाहर राजनीतिक विस्तार की योजना का हिस्सा है। जानिए AIMIM के इस कदम के पीछे की तीन प्रमुख वजहें—मुस्लिम पार्टी की छवि से बाहर निकलने की कोशिश में ओवैसी लंबे समय से यह कहते आए हैं कि उनकी पार्टी सिर्फ मुसलमानों की नहीं, बल्कि सभी वंचित और कमजोर तबकों की आवाज उठाने वाली पार्टी है। गैर मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देकर AIMIM अब अपनी “मुस्लिम पार्टी” वाली छवि तोड़ना चाहती है। पार्टी का उद्देश्य यह दिखाना है कि वह दलित, पिछड़े और गरीब वर्गों के मुद्दों पर भी बराबर जोर देती है।सीमांचल से निकलकर पूरे बिहार में विस्तार की रणनीति मेंपिछले चुनावों में AIMIM ने सीमांचल क्षेत्र — खासकर किशनगंज, अररिया और कटिहार — में अच्छा प्रदर्शन किया था। इस बार पार्टी का लक्ष्य पूरे बिहार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना है। गैर मुस्लिम प्रत्याशियों को उतारकर ओवैसी अन्य समुदायों में भी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि पार्टी को व्यापक जनाधार मिल सके।विपक्षी गठबंधनों पर दबाव की राजनीति मेंAIMIM का यह कदम विपक्षी गठबंधन INDIA और एनडीए दोनों के लिए चुनौती बन सकता है। गैर मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारकर ओवैसी यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी पार्टी अब केवल “मुस्लिम वोट बैंक” की राजनीति तक सीमित नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम AIMIM को ‘किंगमेकर’ की भूमिका में लाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।