
मध्य प्रदेश भारत में विशेष रूप से उज्जैन, खरगोन, इंदौर, होशंगाबाद और मंदसौर जिलों में सोयाबीन की खेती परंपरागत रूप से केंद्रित है। यह राज्य पहले देश का प्रमुख सोयाबीन उत्पादक माना जाता था, इसलिए इसे ‘सोया राज्य’ कहा जाता है।राज्य में सोयाबीन की खेती में किसानों की रुचि में लगातार गिरावट देखी जा रही है। कई किसान अब सोयाबीन की बजाय गेहूँ, कपास और दालों की ओर रुख की खेती की रहे हैं। किसानों की यह नाराजगी उत्पादन की लागत बढ़ने, बाजार अस्थिरता और मौसमी बदलावों के कारण बढ़ रही है।यह समस्या पिछले 2-3 वर्षों में और अधिक गंभीर हो गई है। हाल ही के मानसूनों में अनियमित बारिश और समय पर पानी न मिलने के कारण फसलें प्रभावित हुई हैं। इसी दौरान सोयाबीन के भाव बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते किसान आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं मौसम की अनिश्चितता: लगातार सूखा या अत्यधिक बारिश फसल को नुकसान पहुंचा रही है।उच्च उत्पादन लागत: बीज, उर्वरक, कीटनाशक और कृषि मजदूरी की लागत बढ़ने से मुनाफा बहुत कम हो गया है।जिसके वजह से बाजार अस्थिरता: सरकार द्वारा समर्थन मूल्य या मंडी मूल्य पर्याप्त नहीं होने के कारण किसान आर्थिक जोखिम का सामना कर रहे हैं कृषि विशेषज्ञ और राज्य कृषि विभाग ने किसानों को खेती के लिए तकनीकी और वित्तीय मदद देने की कोशिश कर रहे हैं किसानों की आर्थिक चिंता और फसल जोखिम के चलते, वे सोयाबीन की खेती छोड़कर अन्य फसलों की ओर आकृषित हो रहे हैं। राज्य कृषि विभाग ने सुझाव दिया है कि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और सुनिश्चित मार्केटिंग की सहायता दी जाए ताकि सोयाबीन उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा सके।