एंकर देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ सामने आया है। सीपीआई (माओवादी) संगठन की सशस्त्र इकाई पीएलजीए के सबसे बड़े कमांडरों में शामिल बारसे देवा उर्फ बारसे सुक्का @ देवा ने 18 अंडरग्राउंड नक्सलियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इस दौरान सुरक्षा बलों को भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद सौंपा गया है।
सुकमा जिले के पूर्वती गांव का निवासी 49 वर्षीय बारसे देवा लंबे समय तक सीपीआई (माओवादी) संगठन की सैन्य ताकत की रीढ़ माना जाता रहा है। वह पीएलजीए बटालियन का कमांडर था और संगठन के भीतर उसकी पहचान एक सख्त, रणनीतिक और जमीनी कमांडर के रूप में रही है।
दिवंगत नक्सली नेता माडवी हिड़मा के करीबी रहे बारसे देवा को हथियारों की सप्लाई, विस्फोटक नेटवर्क और आईईडी निर्माण में विशेष दक्षता हासिल थी। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कई बड़े नक्सली ऑपरेशनों की योजना में उसकी भूमिका अहम रही है।
तेलंगाना और दक्षिण बस्तर में संगठन कमजोर
बारसे देवा के साथ ही तेलंगाना स्टेट कमेटी के वरिष्ठ सदस्य कंकनाला राजी रेड्डी @ वेंकटेश का आत्मसमर्पण संगठन के लिए दोहरा झटका माना जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि इस घटनाक्रम के बाद तेलंगाना मूल के सक्रिय अंडरग्राउंड नक्सलियों की संख्या घटकर सिर्फ 17 रह गई है, जिससे क्षेत्र में माओवादी ढांचा लगभग बिखर चुका है।
हथियार और नकदी की बरामदगी
आत्मसमर्पण के दौरान सुरक्षा बलों को जो सामग्री सौंपी गई, उसमें शामिल हैं—
AK-47 सहित कुल 48 हथियार
2206 राउंड जिंदा कारतूस
ग्रेनेड, एलएमजी, इंसास और विदेशी राइफलें
20 लाख 30 हजार रुपये नकद
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के वर्षों में यह हथियारों की सबसे बड़ी सामूहिक सरेंडर में से एक है।
क्यों छोड़ा हथियारों का रास्ता
सूत्रों के मुताबिक, लगातार सुरक्षा दबाव, संगठन के भीतर बढ़ती असंतोष की स्थिति, नेतृत्व संकट और सरकार की पुनर्वास नीति ने नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की अपील का भी इस फैसले पर असर माना जा रहा है।
पुलिस की दो टूक अपील
तेलंगाना पुलिस ने शेष अंडरग्राउंड नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील करते हुए कहा है कि आत्मसमर्पण करने वालों को सुरक्षा, पुनर्वास और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित किया जाएगा।
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