रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने देश की रणनीतिक परमाणु बलों (Strategic Nuclear Forces) के व्यापक सैन्य अभ्यास (Military Drills) का आदेश जारी किया है। इन अभ्यासों में रूस की परमाणु मिसाइल प्रणालियों, लंबी दूरी के बमवर्षक विमानों, और नौसैनिक परमाणु की भागीदारी होगी। इसका मकसद रूस की सैन्य तत्परता को परखना और यह दिखाना है कि देश अपनी रक्षा क्षमता पर पूरी तरह नियंत्रण रखता है।

यह निर्णय तब लिया गया जब पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच प्रस्तावित बुडापेस्ट शिखर सम्मेलन (Budapest Summit) को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (put on hold) कर दिया गया। यह बैठक दोनों नेताओं के बीच सुरक्षा, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए निर्धारित थी,अभ्यासों का आयोजन रूस के विभिन्न सैन्य अड्डों, मिसाइल परीक्षण स्थलों और नौसैनिक ठिकानों पर किया जाएगा डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति, जिनसे पुतिन की बैठक प्रस्तावित थी।इसके अलावा, रूसी रक्षा मंत्रालय, रणनीतिक मिसाइल बल, वायु सेना, और नौसेना कमान इस अभ्यास में शामिल थे ।रूस के भीतर भी यह कदम पुतिन की मजबूत नेतृत्व छवि को बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उस समय जब पश्चिमी प्रतिबंध और युद्ध से जुड़ी आर्थिक चुनौतियाँ बनी हुई हैं।रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इन अभ्यासों में मल्टी-स्टेज सिमुलेशन किया जाएगा, जिसमें जमीन से अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें, परमाणु बमवर्षक विमान, और परमाणु हथियारों से लैस नौसैनिक जहाजों को शामिल किया जाएगा।