
पूर्व सांसद और भाजपा नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने हाल ही में भोपाल में एक धार्मिक कार्यक्रम में विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी बेटियाँ ‘विधर्मियों’ के घर जाती हैं, तो माता-पिता को उन्हें सख्त सजा देनी चाहिए, यहां तक कि उनकी टांगें भी तोड़ देनी चाहिए। उनका कहना था कि जो बेटियाँ परिवार के मूल्यों का पालन नहीं करतीं, उन्हें अनुशासन में लाना आवश्यक है। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और विपक्षी दलों ने इसे तीखी आलोचना का विषय बनाया। कांग्रेस ने इसे नफरत फैलाने वाला और सांप्रदायिक सौहार्द्र को नुकसान पहुँचाने वाला बताया। कांग्रेस प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता ने सवाल उठाया कि क्या प्रज्ञा ठाकुर भाजपा नेताओं की बेटियों पर भी यही सख्ती लागू करेंगी, जो मुस्लिमों से विवाह कर चुकी हैं। यह बयान प्रज्ञा ठाकुर की पहले की विवादास्पद टिप्पणियों की कड़ी में एक और उदाहरण है, जिसमें उन्होंने ‘लव जिहाद’ और अन्य सांप्रदायिक मुद्दों पर भी बयान दिए हैं। इससे पहले, उन्होंने कहा था कि यदि किसी गैर-हिंदू को मंदिर के पास प्रसाद बेचते देखा जाए, तो उसे पीटना चाहिए।इस बयान के बाद, प्रज्ञा ठाकुर ने अपनी टिप्पणी पर कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है। हालांकि, यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक विमर्श में गरमागरम बहस का कारण बन गया है।