
रायपुर/जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में शुक्रवार को माओवादी हिंसा के खिलाफ बड़ा मोड़ आया, जब 210 माओवादियों ने मुख्यधारा में लौटते हुए आत्मसमर्पण किया। इन माओवादियों ने अपने हथियार जमीन पर रखे और हाथों में संविधान व गुलाब का फूल लेकर लोकतंत्र में विश्वास जताया। आत्मसमर्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।आत्मसमर्पण करने वालों में करीब 110 महिला माओवादी भी शामिल थीं। उन्होंने 153 हथियार—जिनमें AK-47, SLR, INSAS राइफलें, BGL लॉन्चर और पिस्तौल शामिल हैमुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर को “ऐतिहासिक दिन” करार देते हुए कहा, “यह साबित करता है कि सरकार की विश्वास, विकास और पुनर्वास नीति सफल हो रही है। आज जिन युवाओं ने हथियार छोड़े हैं, वे कल विकास की मुख्यधारा में देश का भविष्य बनेंगे।”सरकार ने आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास पैकेज देने की घोषणा की है। इसमें आर्थिक सहायता, रोजगार प्रशिक्षण, आवास योजना और समाज में पुनः बसने की सुविधाएँ शामिल हैं।राज्य पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी अबूझमाड़, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कोंडागांव और सुकमा क्षेत्रों से हैं। पिछले कुछ महीनों में बढ़ी सुरक्षा अभियानों और विकास कार्यों के चलते नक्सलियों में असंतोष बढ़ा है, जिसके बाद यह आत्मसमर्पण हुआ।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण है। इससे बस्तर और उत्तरी छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवाद का असर काफी कमजोर हुआ है।