बिहार बक्सर में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। भाजपा के वरिष्ठ और पुराने कार्यकर्ता अमरेंद्र पांडेय ने पार्टी से टिकट न मिलने पर सियासी मोड़ ले लिया है और अब उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया है।इस फैसले के साथ ही बक्सर की राजनीति में नया समीकरण बन गया है। अब इस विधानसभा सीट पर मुकाबला होगा भाजपा के आधिकारिक प्रत्याशी, पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा, और अमरेंद्र पांडेय के बीच।नामांकन के बाद मीडिया से बातचीत में अमरेंद्र पांडेय ने पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “पार्टी ने इस बार उन लोगों को आगे बढ़ाया है जिन्हें कभी अर्बन नक्सल कहा जाता था। इस बार लड़ाई है बक्सर के एक साधारण कार्यकर्ता और एक ब्यूरोक्रेट के बीच।”अमरेंद्र पांडेय की इस बगावत ने भाजपा के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उनका इस बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना, पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।बक्सर विधानसभा क्षेत्र की सियासत में यह मुकाबला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यहाँ के मतदाता हमेशा से सक्रिय रहे हैं और स्थानीय नेताओं की लोकप्रियता पर चुनाव परिणाम काफी हद तक निर्भर करते हैं।हालांकि, भाजपा की ओर से अभी तक इस स्थिति पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बक्सर के मतदाता इस सियासी टकराव में किस पर भरोसा जताते हैं – पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार पर या फिर पुराने कार्यकर्ता अमरेंद्र पांडेय पर।