
रायपुर जिले में स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री एक बार फिर विवादों में आ गई है। सोमवार (17 नवंबर) की शाम श्रम विभाग की टीम ने खरोरा पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री में छापा मारा।कार्रवाई के दौरान 40 नाबालिग बच्चियों और 30 नाबालिग लड़कों को रेस्क्यू कर रायपुर लाया गया। सभी बच्चों को उम्र और अन्य जांच के लिए रायपुर माना कैंप भेजा गया है।श्रम विभाग का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन इन नाबालिग बच्चों से काम करवा रहा था, जो बालश्रम कानूनों का सीधा उल्लंघन है।

पहले भी रहा है विवादों मेंमोजो मशरूम फैक्ट्री कोई पहली बार सुर्खियों में नहीं आई है। इससे पहले भी श्रम विभाग ने यहां से सैकड़ों नाबालिगों को मुक्त कराया था।इसके अलावा कारखाने से फैलने वाली तेज दुर्गंध को लेकर क्षेत्रीय विधायक अनुज शर्मा ने विधानसभा में सवाल भी उठाए थे।प्रबंधन पर गंभीर आरोपफैक्ट्री में तैनात कुछ मैनेजरों पर पहले भी मारपीट, महिलाओं से बदसलूकी और गांव की महिलाओं के अपहरण तक की शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इस संबंध में खरोरा थाने में कई FIR भी दायर हो चुकी हैं।लगातार विवादों के चलते फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका सवालों के घेरे में है।
✍️ हमारा दृष्टिकोण मोजो मशरूम फैक्ट्री पर बार-बार हो रही ऐसी कार्रवाई यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर निगरानी तंत्र कहां कमजोर पड़ रहा है? यदि एक ही संस्थान से हर कुछ महीनों में नाबालिगों को रेस्क्यू करना पड़े, तो यह केवल प्रशासनिक असफलता नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की भी गंभीर विफलता है।बच्चे किसी भी उद्योग की उत्पादन इकाई नहीं हैं—वे देश का भविष्य हैं। नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले ऐसे उद्योगों पर सख्त कार्रवाई समय की मांग है, ताकि कमजोर वर्गों का शोषण रोका जा सके और जिम्मेदार उद्योग संस्कृति स्थापित हो सके।