

अहमदाबाद, 30 अक्टूबर 2025) गुजरात हाईकोर्ट में एक बेहद संवेदनशील मामले की सुनवाई के दौरान 15 वर्षीय नाबालिग रेप पीड़िता ने एक बच्ची को जन्म दिया। यह मामला तब सामने आया जब अदालत गर्भपात (अबॉर्शन) की अनुमति को लेकर सुनवाई कर रही थी। पीड़िता 35 सप्ताह की गर्भवती थी और अदालत में चिकित्सा रिपोर्ट पेश की गई तो इस बीच, सुनवाई के दौरान ही पीड़िता ने बच्ची को जन्म दे दिया।दरअसल यह मामला कुछ महीनों पहले सामने आया था, जब एक नाबालिग लड़की के रेप के बाद गर्भवती होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता के परिवार ने अदालत से गर्भपात की अनुमति मांगी थी वही मेडिकल टीम ने शुरुआत में गर्भपात को सुरक्षित बताया था, लेकिन जब मामला अदालत तक पहुंचा तब तक गर्भ 35 सप्ताह का हो चुका था। इस स्थिति में डॉक्टरों ने बताया कि अबॉर्शन से मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है। इसी बीच, गुरुवार को सुनवाई के दौरान पीड़िता ने बच्ची को जन्म दे दिया जिसका खर्च 6 महीने तक राज्य सरकार उठाएगी घटना की जानकारी मिलते ही गुजरात राज्य सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए बच्ची और मां की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि नवजात और मां के चिकित्सा, पोषण और देखभाल का खर्च अगले छह महीने तक सरकार उठाएगी। इसके अलावा, जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि पीड़िता को काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता भी दी जाए। गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि यह मामला मानवता और संवेदनशीलता से जुड़ा हुआ है । अदालत ने आदेश दिया कि पीड़िता को सुरक्षित माहौल में रखा जाए और नवजात की सेहत पर लगातार निगरानी रखी जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार को चाहिए कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए त्वरित कानूनी और चिकित्सा सहायता प्रणाली विकसित की जाए।यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पीड़िता नाबालिग है और उसकी गर्भावस्था बलात्कार का नतीजा थी। भारतीय कानून (POCSO Act) के तहत, ऐसे मामलों में नाबालिग की इच्छा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। अदालत और सरकार दोनों ने यह सुनिश्चित किया है कि मां और बच्ची की जान सुरक्षित रहे।*आगे की कार्रवाई:-राज्य सरकार ने जिला बाल संरक्षण इकाई को निर्देश दिए हैं कि पीड़िता के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए और बच्ची की देखभाल के लिए विशेष टीम गठित की जाए। वहीं, पुलिस ने आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट और बलात्कार के तहत मामला दर्ज कर लिया है, जिसकी अभी जांच जारी है वही 35 सप्ताह की गर्भावस्था में सुनवाई के दौरान अदालत ने छः महीने तक बिहार सरकार को इसका खर्च उठाने का फैसला दिया है