

नई दिल्ली:कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में चलाए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार को एक गलत निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक स्थल पर सेना भेजकर इस तरह का ऑपरेशन चलाना उचित नहीं था, और इसकी भारी कीमत तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।चिदंबरम यह टिप्पणी पत्रकार हरिंदर बावेजा की किताब ‘दे विल शूट यू, मैडम’ पर चर्चा के दौरान कर रहे थे। इस किताब में बावेजा ने लिखा है कि इंदिरा गांधी को ऑपरेशन ब्लू स्टार की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी। जब इस विषय पर चिदंबरम से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस बात से सहमति जताई।उन्होंने कहा,> “मैं सेना के किसी अधिकारी का अपमान नहीं कर रहा, लेकिन जिस तरह से ऑपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम दिया गया, वह बेहद गलत था। सेना को बाहर रखकर भी स्वर्ण मंदिर को खालिस्तानी उग्रवादियों से मुक्त कराया जा सकता था। मैं सहमत हूं कि इस फैसले की कीमत इंदिरा गांधी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।”चिदंबरम ने आगे कहा कि यह निर्णय केवल सरकार का नहीं था, बल्कि सेना, पुलिस, खुफिया एजेंसियों और नौकरशाही—सबकी भूमिका इसमें रही थी। इसलिए इसके लिए केवल इंदिरा गांधी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।पंजाब की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए चिदंबरम ने कहा कि आज प्रदेश की मुख्य समस्या आर्थिक है, न कि खालिस्तानी अलगाववाद। उन्होंने कहा,> “मुझे लगता है कि पंजाब में खालिस्तान से जुड़ी समस्या अब लगभग खत्म हो चुकी है। अब सबसे बड़ी चुनौती राज्य की अर्थव्यवस्था को सुधारने की है।”क्या था ऑपरेशन ब्लू स्टार?15 दिसंबर 1983 को कट्टरपंथी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले अपने हथियारबंद साथियों के साथ स्वर्ण मंदिर परिसर में जा बसे थे। उन्होंने अकाल तख्त पर कब्जा कर लिया था, जो सिख धर्म की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है।भिंडरावाले दिल्ली सरकार को खुली चुनौती दे रहे थे। उनका कहना था कि हिंदू पंजाब छोड़कर चले जाएं। स्थिति गंभीर होती देख तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सेना को कार्रवाई का आदेश दिया। 5 जून 1984 की शाम से सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया।दो दिन तक भीषण गोलीबारी चली। 6 जून की रात को भिंडरावाले का शव बरामद हुआ और इसके साथ ही ऑपरेशन समाप्त हुआ।इस कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए थे, जिनमें निर्दोष श्रद्धालु भी शामिल थे।इसके कुछ महीनों बाद, 31 अक्टूबर 1984 को, इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।