एंकर:-कभी लाल आतंक के गलियारे के नाम से पहचाना जाने वाला अबूझमाड़ अब शांति और विकास की नई कहानी लिख रहा है। जो लोग कभी हिंसा और हथियारों का रास्ता अपनाए हुए थे, वही आज शांति का संदेश लेकर मैराथन की तैयारी कर रहे हैं। आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली अब हथियार छोड़कर शांति की दौड़ में शामिल होने जा रहे हैं।
नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में मध्य भारत की सबसे बड़ी पीस ऑफ मैराथन का आयोजन होने जा रहा है। इस मैराथन में हिस्सा लेने के लिए पुनर्वासित नक्सलियों ने 5 किलोमीटर की अभ्यास मैराथन दौड़ पूरी की।
मैराथन की तैयारी के तहत प्रतिभागी रोजाना सुबह पीटी, योग और दौड़ का अभ्यास कर रहे हैं। नारायणपुर के लाइवलीहुड कॉलेज में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे लगभग 140 पुनर्वासित माओवादी इस आयोजन में भाग लेंगे।
समाज की मुख्यधारा से जुड़कर ये पुनर्वासित युवा शांति की दौड़ लगाते हुए क्षेत्र में सुरक्षा, विकास और भाईचारे का संदेश देंगे।
