
दीपावली के दौरान बनने और बिकने वाले घरेलू/देसी कार्बाइड गन (calcium carbide से बनने वाले छोटे ‘गन’/खिलौने) के प्रयोग से भोपाल और आसपास के जिलों में सैकड़ों लोग खासकर बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए है और आँखों में गंभीर चोट और जलने हैं; अस्पतालों में भारी भीड़ और बेड व्यवस्था पर दबाव देखा गया हुआ कुछ समाचारों में घायल लोगों की संख्या 60 से लेकर 186 तक बताई जा रही है। दीपावली के मौके पर कैल्शियम कार्बाइड, प्लास्टिक पाइप और गैस लाइटर जैसी चीज़ों से बने छोटे ‘कार्बाइड गन’ का प्रयोग किया जा रहा था ये उपकरण विस्फोट करके प्लास्टिक के टुकड़े से तेज ज्वाला निकालते हैं, जिससे आँखें, चेहरे और त्वचा गंभीर रूप से घायल हो रही हैं। कई बच्चों की आँखों की रोशनी भी चली जाने की रिपोर्टें आईं है सबसे ज़्यादा मामले में भोपाल में दर्ज हुए है साथ ही विदिशा, ग्वालियर, इंदौर जैसे मध्य प्रदेश के अन्य शहरों में भी लोग घायल हुए है प्रभावित अधिकतर बच्चे और युवा हैं; अस्पतालों में कई सर्जिकल और नेत्र विशेषज्ञों को आपात कर्म के तौर पर तैनात करना पड़ा पुलिस और प्रशासन ने कई ‘कार्बाइड गन’ ज़ब्त की और कुछ विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू की दी गई है ये संसाधन सस्ते, आसानी से बनने- बिकने वाले और सोशल मीडिया वायरल ट्रेंड के कारण लोकप्रिय हुए। कैल्शियम कार्बाइड पर थोड़ी-सी नमी आने पर एसीटिलीन गैस बनती है, जो स्पार्क पर विस्फोट का काम करती हैघरेलू सामानों से बनाई गई ये ‘गन’—पाइप में कार्बाइड डालकर, पानी की बूंद डालकर और लाइटर से स्पार्क देने पर—विस्फोट करती हैं।