अंबिकापुर -अंबिकापुर से इस वक्त एक बड़ी और राहत भरी खबर।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में
छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “हमर लैब”
आज ज़मीन पर सफल होती नजर आ रही है।सटीक जांच और समय पर रिपोर्ट से अब आम जनता को बड़ी राहत मिल रही है।हम आपको दिखाते हैं अंबिकापुर हमर लैब की
ग्राउंड से पूरी स्पेशल रिपोर्ट।
वीओ – 1 (लैब और मरीजों के विजुअल)
अंबिकापुर के जिला अस्पताल / मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थित
हमर लैब में सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।
शहर ही नहीं, बल्कि सरगुजा संभाग के दूर-दराज गांवों से
लोग यहां जांच कराने पहुंच रहे हैं।ब्लड टेस्ट, शुगर, थायराइड,
लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट,
डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों की जांचें मुफ्त की जा रही हैं।
बाइट – मरीज 1
“पहले प्राइवेट लैब में 2–3 हजार रुपये खर्च हो जाते थे,
अब सरकारी अस्पताल में ही
कम पैसों में सही रिपोर्ट मिल जाती है।”
वीओ – 2 (महिला, बुजुर्ग, ग्रामीण विजुअल)
हमर लैब खास तौर पर
गरीब, मध्यम वर्ग और ग्रामीण मरीजों के लिए
काफी फायदेमंद साबित हो रही है। इलाज से पहले सही जांच और समय पर रिपोर्ट
अब मरीजों के लिए आसान हो गई है।
बाइट – महिला मरीज
“हम जैसे लोगों के लिए यह बहुत बड़ी सुविधा है।
सरकार की यह योजना सच में काम कर रही है।”
वीओ – 3 (मशीन, स्टाफ, रिपोर्ट प्रिंट
हमर लैब में आधुनिक मशीनें,
प्रशिक्षित लैब टेक्नीशियन
और तय समय-सीमा में रिपोर्ट देने की व्यवस्था है।
ज्यादातर रिपोर्ट उसी दिन या अगले दिन
मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही है।
बाइट – डॉ मिराज फातिमा नोडल अधिकारी
“हमर लैब का उद्देश्य है
हर मरीज को सटीक और समय पर जांच सुविधा देना।
हम लगातार सेवाओं को और बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”
वीओ – 4
समय पर जांच होने से
डॉक्टरों को सही इलाज तय करने में भी मदद मिल रही है।
इसका सीधा असर मरीजों की सेहत पर देखने को मिल रहा है
बाईट-डॉ रमेश आर्य मेडिकल सुपरीटेंडेंट जिला चिकित्सालय
हमर लैब बखूबी
छत्तीसगढ़ सरकार की हमर लैब योजना न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रही है,
बल्कि आम जनता का
सरकारी अस्पतालों पर भरोसा भी बढ़ा रही है।
कुल मिलाकर अंबिकापुर में
हमर लैब आम लोगों के लिए
भरोसेमंद और समय पर जांच की एक मजबूत व्यवस्था बन चुकी है। सरकारी योजनाएं जब ज़मीन पर उतरती हैं,
तो उसका फायदा सीधे जनता को मिलता है। अंबिकापुर से साधना न्यूज़ के चंद्रशेखर गुप्ता की रिपोर्ट