मोहला // शराब नीति में सख्ती और प्रशासन के दावों के बावजूद चार-चार थाना और लगभग 50 किलोमीटर का सफर पार करके शराब का भारी जखीरा जिले की अंतिम तहसील औंधी तक पहुंच रहा है। क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया है कि मोटी रकम लेकर औंधी थाना क्षेत्र में बाहरी लोगों को खुली छूट दी जा रही है, जो गांव-गांव में काउंटर खोलकर हर ब्रांड की अवैध शराब खुलकर बेच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध कारोबार सरकारी दुकान की तर्ज पर बेधड़क संचालित है, जहां अंग्रेजी सहित देशी मदिरा भी ब्लैक में दुगुनी कीमत पर उपलब्ध है।
जबकि अवैध नशे के कारोबार को रोकने के लिए कलेक्टर तुलिका प्रजापति और पुलिस अधीक्षक वाई.पी. सिंह ने सभी थाना प्रभारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दे रखे हैं। इसके बावजूद जिले में यह अवैध धंधा निरंतर बढ़ रहा है और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
सड़क दुर्घटनाओं के पीछे भी शराब का सेवन बड़ा कारण
जिले में सड़क दुर्घटनाओं में लगातार हो रही मौतों के पीछे प्रशासन शराब सेवन को बड़ी वजह मान रहा है। इसी बीच अनुसूचित जनजाति क्षेत्र औंधी में अवैध शराब का कारोबार चोरी-छिपे नहीं, बल्कि खुलेआम काउंटर पर बेचा जा रहा है। इसके कारण युवा पीढ़ी के साथ-साथ आदिवासी बाहुल्य गांवों के परिवार नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार औंधी थाना क्षेत्र के कई गांवों में पुलिस के संरक्षण में अवैध शराब की बिक्री जारी है। बताया गया कि इस धंधे में गांवों में बसे बाहरी लोग सक्रिय हैं जो अंग्रेजी शराब से लेकर देशी मदिरा तक सब कुछ ऊंचे दाम पर बेच रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बदले में पुलिस को मोटी रकम दी जा रही है।
पुलिस कप्तान का बयान
“ऐसी गतिविधि हो रही होगी तो पूरे मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
— वाई.पी. सिंह, पुलिस अधीक्षक, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी
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50 किलोमीटर की दूरी कैसे पार कर रही है शराब की खैप?
मानपुर मुख्यालय स्थित सरकारी शराब दुकान से औंधी तक लगभग 50 किलोमीटर की दूरी में
मानपुर, कोहका, सीतागांव, गढ़डोमी पुलिस कैंप और औंधी थाना सहित कई सुरक्षा चौकियां स्थित हैं।
इसके बावजूद इतनी संवेदनशील बेल्ट में शराब की खपत औंधी तक पहुंचना कई सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से संचालित हो रहा है।
इन गांवों में धड़ल्ले से बिक रही अवैध शराब
ग्रामीणों के मुताबिक—
मेढा, पालेभट्टी, डोंगरगांव सहित कई गांवों में बाहरी लोग खुलेआम हर ब्रांड की शराब काउंटर में बेच रहे हैं।
स्थानीयों ने इस अवैध बिक्री के वीडियो भी बनाए हैं, जो अब सोशल मीडिया में चर्चित हो रहे हैं।
ग्राम प्रमुखों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में
क्षेत्र में हो रहे सड़क हादसों में बढ़ती मौतों और गांवों में बर्बादी की राह पर बढ़ते परिवारों के बाद भी
सरपंच, सचिव, पटेल, ग्राम अध्यक्ष और कोटवार इस अवैध कारोबार पर मौन हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम नेतृत्व की यह चुप्पी भी खुद अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करती है।